नैसकॉम केस स्टडी

प्रोजेक्‍ट ऐरो वह दृष्टि है जिसकी परिकल्‍पना और जिसका क्रियान्‍वयन अत्‍यंत कम समय में किया गया। इस अध्‍ययन के अंतर्गत इस तथ्‍य को रेखांकित किया गया है कि सरकारी तंत्र में परिवर्तन की प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित किया जा सकता है क्‍योंकि इस तंत्र को प्राय: पुरातन, धीमी गति तथा नौकरशाही के वातावरण वाला समझ लिया जाता है। इस अध्‍ययन में भारतीय डाक, जोकि एक सरकारी उद्यम है, में परिवर्तन तथा उसके प्रबंधन की मूल भावना निहित है, जिसका उद्देश्‍य (क) ग्राहक सेवा में सुधार तथा (ख) भारतीय डाक को पुन: सर्वोच्‍च स्‍थान पर लाने के उद्देश्‍य से निजी क्षेत्र के कूरियरों से प्रतिस्‍पर्द्धा में लाना  है। सबसे महत्‍वपूर्ण यह है कि इस अध्‍ययन ने इस तथ्‍य को रेखांकित किया है कि दूरदर्शी नेतृत्‍व, कर्मचारियों की प्रतिबद्धता, सुव्‍यवस्थित नियोजन और कार्यान्‍वयन पर ध्‍यान केन्द्रित करके किसी सरकारी उद्यम में भी सफल परिवर्तन करना संभव है।

विशाल कर्मचारी गण, पुरातन प्रक्रियाओं और प्रणालियों, निरंतर बदलते नेतृत्‍व और सौंपे गए सामाजिक दायित्‍वों वाले किसी भी विशाल सरकारी संगठन की भांति परिवर्तन की प्रक्रिया के लिए सभी भागीदार पक्षों की सहमति आवश्‍यक है। परंतु, इस सहमति को प्राप्‍त करने की राह में महत्‍वपूर्ण बाधाएं हैं। इन बाधाओं में निहित स्‍वार्थ से लेकर मानवीय दोषदर्शिता की प्रवृत्ति तक शामिल हैं, जो प्रारंभ में परिवर्तन को रोक देने की चेष्‍टा करते हैं। यह सर्व सहमति तब तक नहीं उभर सकती जब तक कि नेतृत्‍व की ओर से, अंतिम उद्देश्‍य को मद्देनजर रखते हुए, इस परियोजना को स्‍पष्‍ट दृष्टिकोण, स्‍पष्‍ट रूप से परिभाषित लक्ष्‍यों और पूर्ण दृढ़ निश्‍चय के साथ समयबद्ध रूप से कार्यान्वित करने की प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त न की जाए। साथ ही यह भी ध्‍यान में रखा जाए कि सोच और पूरी कार्य-संस्‍कृति के परिवर्तन में समय लग सकता है।

प्रोजेक्‍ट ऐरो नेतृत्‍व की ओर से डाकघरों के ‘रूप और परिवेश’ में सुधार करने के प्रयास स्‍वरूप प्रारंभ किया गया। स्‍वरूप में सुधार की यह योजना बनाते हुए नेतृत्‍व टीम ने पाया कि इतना ही महत्‍वपूर्ण यह भी है कि‘ मूल  प्रचालनों में’  सुधार लाने की भी एक वृहद् योजना चलाई जाए। प्रचालनात्‍मक सुधार के अभाव में ‘कास्‍मेटिक परिवर्तन’ का प्रभाव कुछ ही समय में कम हो जाएगा और संगठन अपरिवर्तित ही रह जाएगा। यह एहसास होने के बाद डाकघर की सेवाओं में सुधारलाने के एक समग्र और एकीकृत दृष्टिकोण को विकसित करने पर ध्‍यान केन्द्रित किया गया ताकि डाकघर, आम आदमी के प्रति अपने सौंपे गए अधिदेश का निर्वहन अधिक प्रभावी ढंग से कर सकें। इस अध्‍ययन में 150 वर्ष पुराने सार्वजनिक क्षेत्र के संगठन के इतिहास और इसकी जटिलताओं के मद्देनजर कार्य-योजना के विकास और कार्यान्‍वयन की राह की चुनौतियों पर ध्‍यान केन्द्रित किया गया है। सर्व सहमति प्राप्‍त करने के लिए विभिन्‍न वर्गों का समर्थन प्राप्‍त करना होगा, जिनमें जमीनी स्‍तर पर कार्यरत कर्मचारीगण, अधिकारी(जो स्‍वयं पर इस परियोजना के प्रभाव को लेकर आशंकित हो सकते हैं) शामिल हैं। साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी प्रणालियों को सुव्‍यवस्थित बनाना होगा, समुचित निवेश प्राप्‍त करना होगा, प्रशिक्षण प्रदान करने के माध्‍यम से कर्मचारियों की क्षमता में सुधार करना होगा और सबसे महत्‍वपूर्ण यह है कि इस परिवर्तन को लेकर ट्रेड यूनियनों की समझ विकसित करनी होगी और इसके लिए उनका समर्थन प्राप्‍त करना होगा।