संकल्पना पत्र

प्रोजेक्‍ट ऐरो – उद्देश्‍य, योजना और परिदेय

प्रोजेक्ट ऐरो की परिकल्पना अप्रैल, 2008 में की गई। इस परियोजना के तहत ‘मूलभूत  कार्यकलापों के क्षेत्र’ में सेवा की गुणवत्ता का उन्नयन एवं उनके ‘लुक एवं फील’ में सुधार लाकर शहरी एवं ग्रामीण, दोनों क्षेत्रों में डाकघरों का उन्नयन करने की परिकल्पना की गई है। इस परियोजना का उद्देश्य डाकघरों में कर्मचारियों के साथ ही आने वाले ग्राहकों के लिए सहायक एवं मैत्रीपूर्ण कार्य वातावरण सृजित करना,सुरक्षित कनेक्टिविटी के माध्यम से सभी सूचना प्रौद्योगिकी आधारित सेवाएं प्रदान करना, मूलभूत  कार्यकलाप जैसे कि डाक वितरण, इलेक्ट्रानिक व मैनुअल, धन प्रेषण तथा डाक बचत योजनाओं के  सेवा के  गुणवत्ता स्‍तर में सुधार लाना है। इस अवधारणा का परीक्षण अप्रैल 2008 में प्रायोगिक तौर पर 10 डाक सर्किलों के 50 डाकघरों में शुरु किया गया था।

इस प्रायोगिक परियोजना के उद्देश्‍य निम्नानुसार हैं : 

  • “आम आदमी” के लिए डाकघर प्रचालनों में एक स्पष्ट, ठोस एवं उल्लेखनीय परिवर्तन लाना :

भारतीय डाक का लगभग 89% नेटवर्क ग्रामीण क्षेत्रों में है और इसलिए इस नेटवर्क को नई प्रौद्योगिकी एवं आधारभूत संरचना से सशक्‍त बनाने की जरूरत है जिससे ग्रामीण जनसाधारण का विश्व के साथ प्रत्यक्ष संप्रेषण स्थापित हो सके तथा ग्रामीण क्षेत्रों में जीवनयापन कर रहे लोगों के दरवाजे तक विकास का लाभ पहुंच सके। सामाजिक हित योजनाएं जैसे एनआरईजीएस, राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना तथा केन्द्र एवं राज्य सरकारों की बहुत सी ऐसी योजनाओं को अंतिम छोर तक प्रभावी वितरण प्रणाली की आवश्यकता होती है। भारतीय डाक अपने विशाल नेटवर्क, प्रशिक्षित मानवशक्ति तथा सूचना प्रौद्योगिकी संरचना के साथ लक्षित आबादी तक इन सामाजिक लाभ स्कीमों के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यह प्रायोगिक परियोजना इस लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने का पहला कदम है।

  • ग्रामीण तथा शहरी, दोनों क्षेत्रों में चुनिन्दा डाकघरों के माध्यम से अल्पावधि प्रभाव सुनिश्चित करना;

प्रायोगिक परियोजना के सफलतापूर्वक पूर्ण होने पर वृहद् पैमाने पर एक रोल-आउट प्लान की रूप रेखा तैयार की जाए।

  • प्रत्‍येक सुधार क्षेत्र के लिए स्पष्ट रूप से परिभाषित प्रमुख निष्पादक सूचकांक का इस्तेमाल करते हुए प्रगति को निरंतर आधार पर सत्‍यापित एवं प्रमाणित करना ;
  • भारतीय डाक के व्यापक, दीर्घकालिक परिवर्तन का आधार रखना ।

प्रौद्योगिकी ने विश्वभर के डाकघरों के कार्य करने के तरीकों को परिवर्तित कर दिया है। वास्‍तव में, इससे स्‍वयं डाकघर के कार्य में ही परिवर्तन आ गया है। संचार के क्षेत्र में घरेलू तथा अंतर्राष्ट्रीय, दोनों स्‍तर पर नई व्‍यावसायिक संभावनाएं उभर रही हैं। नई एवं उभरती चुनौतियों का सामना करने और इन संभावनाओं का लाभ उठाने के लिए भारतीय डाक को इस प्रकार से स्‍वयं को पुनर्गठित करने की जरूरत है कि एक ऐसा तंत्र स्थापित किया जाय जो त्‍वरित प्रतिक्रिया दे, शीघ्रता से अनुकूल बने और अपने व्यवसाय दृष्टिकोण को लचीला रखे। इस प्रायोगिक परियोजना का उद्देश्य सामाजिक उत्तरदायित्‍वों पर  पूरा ध्यान देते हुए भारतीय डाक को जीवन्‍त एवं उत्‍तरदायी व्यावसायिक संगठन के रूप में सुव्यवस्थित तरीके से बदलने के लिए आधार बनाना है।

परियोजना का कार्य क्षेत्र :

  • डाकघरों में, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में, उन सेवाओं को उपलब्ध कराना जो अब तक शहरी क्षेत्रों तक सीमित थीं;
  • डाकघरों को,नई भूमिकाओं एवं चुनौतियों को स्वीकार करते हुए, देश के सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन में वृहद् भूमिका निभाने के लिए सक्षम बनाना ।
  • बड़ी जनशक्ति को एक समर्पित एवं व्यावसायिक मानव संसाधन के रूप में परिवर्तित करना ।
  • विशेषकर उन क्षेत्रों में आईटी समर्थित सेवाओं को अत्‍याधुनिक प्रौद्योगिकी के आधार पर प्रदान करना, जहाँ इसकी अधिक आवश्यकता हो ।
  • डाकघर को अपनी एक अलग पहचान प्रदान करने के लिए उसके रूप एवं परिवेश (लुक एण्ड फील) को बदलना, तथा;
  • स्वावलंबी वृद्धि एवं विकास के लिए आवश्यक निवेश पर लाभ सुनिश्चित करना ।

अपनाई गई रणनीति : 

यह परियोजना 10 सर्किलों के 50 डाकघरों में प्रयोग के तौर पर कार्यान्वित की गई। परियोजना में अब तक V चरणों में ‘लुक एवं फील’ के अंतर्गत 1800 से अधिक तथा ‘मूलभूत क्रियाकलापों’ के अंतर्गत 15000 से अधिक डाकघरों को शामिल कर लिया गया है। परियोजना के विषय को रूप देने तथा कार्यान्वयन की सभी स्‍तरों पर निगरानी रखने के लिए एक संचालन समिति तथा एक कोर टीम का गठन किया गया है। निदेशालय स्‍तर पर 4 सदस्यों वाला कार्यक्रम कार्यालय स्थापित किया गया है, दो वर्क स्ट्रीम लीडरों की भी पहचान की गई है जिनके साथ चार चेंज एजेंट भी रखे गये, जिन्‍हें विभिन्न कार्यकलापों में अपेक्षित परिवर्तनों की योजना

एवं कार्यान्वयन का उत्तरदायित्‍व सौंपा गया। प्रत्‍येक चेंज एजेंट की सहायता के लिए 3 से 4 सदस्य बनाए गए। इसके अन्‍य महत्‍वपूर्ण बिन्‍दु है :-

  • परिवर्तनकारी नेतृत्‍व एवं उनके दलों के साथ संचालन समितियों का गठन;
  • परियोजना के लक्ष्‍य स्पष्ट रूप से परिभाषित किए गये ;
  • ऐसे प्रचालन क्षेत्रों पर ध्यान केन्द्रित किया गया है  जहां न्यूनतम प्रयत्‍न से अधिकतम परिणाम प्राप्‍त हो सके ।
  • प्रमुख निष्पादन संकेतकों की पहचान ;

नियमित निर्धारण एवं मूल्यांकन के लिए निगरानी प्रणाली स्थापित की गयी ;

समय-सीमा का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य ।

संघटक  

इस परियोजना के दो संघटक हैं :

डाक वितरण, धन-प्रेषण, बचत बैंक एवं कार्यालय सेवा स्‍तरों पर ध्यान केंद्रित करते हुए ‘मूलभूत कार्य क्षेत्रों’ में सुधार करना।

ब्रांडिंग, सूचना प्रौद्योगिकी, मानव संसाधन एवं मूलभूत ढाँचे पर ध्यान केंद्रित करते हुए ‘रूप एवं परिवेश’ (लुक एण्ड फील) का आधुनिकीकरण करना।

डाक प्रचालन  :

इसका  मुख्‍य उद्देश्‍य  है इन डाकघरों  में  डाक   प्रचालन संबंधी  सेवा के स्‍तरों  को परिभाषित करके यह  सुनिश्चित करना  कि डाक का वितरण उसकी प्राप्ति के दिन ही हो जाए;

  • वितरण की सूचना, ट्रैक एवं ट्रेस तथा अपेक्षित बुनियादी सुविधाएं प्रदान करना;
  • प्रत्‍येक स्‍तर पर हुई प्रगति के आकलन और मूल्‍यांकन के लिए मानीटरिंग प्रणाली तैयार करना।

धन-प्रेषण :

  • यह सुनिश्चित करना कि प्राप्‍तकर्ताओं को मनीऑर्डर का भुगतान डाकघर में उसकी प्राप्त्‍िा के दिन ही कर दिया जाए;
  • उप डाकघरों और शाखा डाकघरों में नकदी की उपलब्‍धता की राह में आने वाली रुकावटों को समाप्‍त करना;
  • तत्‍काल मनीऑर्डर, इलेक्‍ट्रॉनिक मनीऑर्डर, इलेक्‍ट्रॉनिक अंतर्राष्‍ट्रीय मनीऑर्डर की सेवाएं प्रदान करना;
  • उद्देश्‍यों की प्राप्ति के लिए आवश्‍यक बुनियादी सुविधाओं की उपलब्‍धता सुनिश्चित करना।

डाक बचत योजनाएं :

  • सूचना प्रौद्योगिकी के समावेशन तथा कर्मचारियों को व्‍यवहार कौशल का प्रशिक्षण प्रदान  करना एवं कार्यकुशलता में वृद्धि करके काउंटरों पर प्रतीक्षा समय में कटौती करना;
  • प्रपत्रों तथा अन्‍य स्‍टेशनरी की पर्याप्‍त उपलब्‍धता सुनिश्चित करना;
  • कर्मचारियों के साथ-साथ ग्राहकों को भी विभिन्‍न वित्‍तीय सेवाओं की जानकारी प्रदान करना;
  • महत्‍वपूर्ण कार्य-निष्‍पादन सूचकों के आकलन के लिए मानीटरिंग प्रणाली विकसित करना।

कार्यालय सेवा स्‍तर :

  • काउंटरों पर उपयुक्‍त संकेत-चिन्‍हों के माध्‍यम से सार्वजनिक हॉल में अनुकूल और मैत्रीपूर्ण वातावरण बनाना;
  • सुविधा काउंटरों और सूचना-पत्रकों(लीफलेट) आदि  के माध्‍यम से उपयोगी सार्वजनिक सूचनाओं की उपलब्‍धता सुनिश्चित करना;

ब्रांडिंग:

  • भारतीय डाक के लिए नया प्रतीक चिह्न (लोगो) तैयार करना;
  • भारतीय डाक के महत्‍व को रेखांकित करते हुए एक स्‍लोगन तैयार करना;
  • सभी उत्‍पादों तथा सेवाओं के लिए समान ब्रांड पदानुक्रम तैयार करना। जिसमें काउंटर तथा आउटडोर स्‍टाफ द्वारा पहनी जाने वाली वर्दी आदि भी सम्मिलित होगी;
  • सभी मैनुअलों आदि में नए प्रतीक चिह्न (लोगो) को समाहित करना;

 

प्रौद्योगिकी :

  • सभी चिह्नित डाकघरों को अपेक्षित हार्डवेयर तथा सॉफ्टवेयर से सुसज्जित करना;
  • सभी चिह्नित डाकघरों में लीज्‍ड लाइन/ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी की उपलब्‍धता सुनिश्चित करना;
  • चिह्नित डाकघरों में विद्युत बैक-अप की पर्याप्‍त व्‍यवस्‍था सुनिश्चित करना।

मानव संसाधन :

  • जहां तक संभव हो इन चयनित डाकघरों में या तो रिक्तियों को भरने अथवा कर्मचारियों की पुनर्तैनाती के माध्‍यम से  कर्मचारी बल की इष्‍टतम व्‍यवस्‍था सुनिश्चित करना;
  • इन डाकघरों के लिए अपेक्षित प्रशिक्षण पैकेज तैयार करना और प्रशिक्षकों की पहचान करना;
  • इन डाकघरों में कार्यरत प्रत्‍येक कर्मी के कार्यों का विवरण निर्धारित किया जाना और जहां तक संभव हो इन डाकघरों के पोस्‍टमास्‍टरों और कर्मचारियों को तैनाती के दो वर्षों तक स्‍थानांतरित नहीं किया जाना बशर्ते कि ऐसा करना प्रशासनिक स्‍तर पर अनिवार्य न हो। इसका उद्देश्‍य यह सुनिश्चित करना है कि इस परियोजना के कार्यान्‍वयन में अचानक व्‍यवधान उत्‍पन्‍न न हो;
  • चिह्नित डाकघरों के पोस्‍टमास्‍टरों की बैठक एक स्‍थान पर आयोजित करना ताकि  प्रोजेक्‍ट ऐरो की अवधारणा के बारे में उनको संवेदनशील बनाया जा सके।

बुनियादी संरचना :

  • इन डाकघरों के लिए मानकीकृत तथा समान आंतरिक तथा बाह्य मूल योजना को विकसित करना;
  • इन सभी डाकघरों में समान और मॉड्यूलर फर्नीचर की व्‍यवस्‍था करना।

स्‍थानीय नागरिक घोषणा-पत्र तैयार करना :

प्रोजेक्‍ट ऐरो के अंतर्गत चिह्नित सभी डाकघरों से अपेक्षित है कि वे स्‍थानीय नागरिक फोरम का गठन करें, जिसमें क्षेत्र की डाक सेवाओं में रुचि रखने वाले गणमान्‍य नागरिक सम्मिलित हों। स्‍थानीय नागरिक फोरम ही संबंधित डाकघरों के कार्य-निष्‍पादन मानदंडों का निर्धारण करता है और इन मानदंडों को जनसाधारण के सूचनार्थ सार्वजनिक हॉल में प्रमुख रूप से प्रदर्शित किया जाता है।

परियोजना के लिए धन  की व्‍यवस्‍था :

डाकघरों के‘स्‍वरूप और परिवेश’ में सुधारलाने के लिए कम्‍प्‍यूटर  हार्डवेयर और अन्‍य सहायक उपकरण तथा नए काउंटरों पर होने वाला व्‍यय  योजनागत  निधियों से पूरा किया गया। नए ब्रांड लोगो के सृजन तथा उसके कार्यान्‍वयन और प्रशिक्षण पर होने वाले व्‍यय को भी योजनागत निधि से पूरा किया गया।  इस परियोजना के तहत  पांच चरणों  में  अब तक 259.95 करोड़ रु. व्‍यय किए जा चुके हैं। छठे चरण के लिए परिमंडलों को 73.96 करोड़ रुपयों का आबंटन किया जा चुका है तथा चरणों को 31 दिसंबर 2012 तक पूरा करने का लक्ष्‍य है।

मानीटरिंग प्रणाली (निगरानी तंत्र) :

एक वेब आधारित प्रणाली विकसित की गई है, जिसके अंतर्गत फील्‍ड इकाइयों से बिना किसी मानवीय हस्‍तक्षेप के सर्वर के जरिए आंकड़े सीधे प्राप्‍त किए जा सकते हैं। इन आंकड़ों का  विश्‍लेषण  प्रत्‍येक पखवाड़े के दौरान 22 डाक सर्किलों के सभी मुख्‍य पोस्‍टमास्‍टर जनरलों के समक्ष वीडियो सम्‍मेलन के माध्‍यम से प्रस्‍तुत किया जाता है। इस वीडियो सम्‍मेलन में सभी महत्‍वपूर्ण कार्य-निष्‍पादन सूचकों  से  संबंधित आंकड़ों की बारीकी से जांच की जाती है और कार्यान्‍वयन की खामियों और उनके उपचारात्‍मक उपायों पर चर्चा की जाती है। निदेशालय तथा सभी 22 सर्किल मुख्‍यालयों के स्‍तर पर समर्पित प्रोग्राम कार्यालय स्‍थापित किए जा चुके हैं। डाकघरों से आंकड़ों का आदान-प्रदान और सर्किल प्रोग्राम कार्यालयों से समस्‍त पत्राचार ई-मेल के माध्‍यम से ही किया जाता है।

बाह्य लेखा-परीक्षा(ऑडिट) :

चरण - 1में चिह्नित 50 डाकघरों के कार्य-निष्‍पादन स्‍तर में सुधार की जांच स्‍वतंत्र रूप से बाह्य लेखा-परीक्षा(ऑडिट) के जरिए करवा ली गई है। यह जांच इन कार्यालयों के तीन दौरों पर आधारित है। बाह्य लेखा-परीक्षा के निष्‍कर्षों के आधार पर प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय स्‍थान पर रहे डाकघरों के सभी कर्मियों के लिए एक प्रोत्‍साहन योजना भी बनाई गई है।

चरण

डाकघरों की संख्‍या

पूरा करने के लिए निर्धारित तिथि

लुक एंड फील पर व्‍यय

I

50

1 मई 2008 से 15 अगस्‍त, 2008

12.85 करोड़ रु.

II

450

16 अगस्‍त 2008 से 31 दिसम्‍बर, 2008

74.0  करोड़ रु.

III

500

1 जनवरी 2009 से 30 जून 2009

65.0 करोड़ रु.

IV- क

383

1 जून 2010 से 31 अक्‍तूबर 2010

59.90 करोड रु.

IV- ख

147

1 नवम्‍बर, 2010 से 28 फरवरी, 2011

23.64 करोड़ रु.

V

229

15 फरवरी, 2012 से 31 मार्च, 2012

25.0 करोड़ रु.