परियोजना एरो के बारे में

About Project Arrow

About Project Arrow

भारतीय डाक को एक जीवंत एवं उत्तरदायी संगठन बनाने के उद्देश्य से भारतीय डाक ने
प्रोजेक्ट ऐरो नामक एक गुणवत्ता सुधार परियोजना शुरू की है। इसे अप्रैल, 2008 में शुरू किया गया। विशिष्ट रूप में परिभाषित किया जाए तो, प्रोजेक्ट ऐरो में डाकघरों के प्रमुख कार्यक्षेत्रों (मूल कार्यक्षेत्रों में सुधार) के साथ-साथ उस परिवेश (लुक एण्ड फील) का समग्र सुधार शामिल है जहां डाक लेन-देन होता है। प्रमुख कार्यक्षेत्रों में सेवाओं की गुणवत्ता को बढ़ाने में डाक वितरण, धन प्रेषण, बचत बैंक एवं कार्यालय सेवा स्तरों में सुधार पर ध्यान केंद्रित करना सम्मिलित है। इससे विभाग को खुदरा उत्पादों के लिए वन-स्टॉप शॉप के रूप में उभरने तथा बैंकिंग, धन प्रेषण तथा सामाजिक एवं नागरिक पहलों सहित अन्य वित्तीय उत्पादों तथा सेवाओं को प्रदान करने के लिए एकल खिड़की सुविधा प्रदान करने में सहायता मिल रही है। प्रमुख कार्यक्षेत्रों की मॉनीटरिंग का विस्तार देश भर के 15,500 से अधिक कंप्यूटरीकृत डाकघरों में किया गया है तथा 1,843 डाकघरों में लुक एवं फील को सुधारा गया है।

प्रोजेक्ट ऐरो - उद्देश्य, कार्यनीति एवं परिदेय:

प्रोजेक्ट ऐरो की अवधारणा अप्रैल, 2008 में विकसित हुई। प्रोजेक्ट ऐरो का उद्देश्य 'प्रमुख कार्यक्षेत्रों' में सेवा स्तरों में सुधार करते हुए तथा 'लुक एण्ड फील' को सुधार कर ग्रामीण एवं शहरी, दोनों क्षेत्रों के डाकघरों का उन्नयन करना है। इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य सभी कर्मचारियों एवं डाकघर के ग्राहकों के लिए एक सहायक एवं दोस्ताना कार्य परिवेश सृजित करना, सुरक्षित कनैक्टिविटी के माध्यम से आईटी समर्थित सेवाएं प्रदान करना, डाक वितरण, इलैक्ट्रॉनिक एवं मैनुअल दोनों प्रकार के धन प्रेषण तथा डाक बचत योजनाओं संबंधी प्रमुख व्यवसाय क्षेत्रों में सेवा के गुणवत्ता स्तर में सुधार लाना है। इस अवधारणा को जांचने के लिए अप्रैल, 2008 में 10 डाक सर्किलों में 50 डाकघरों को शामिल करते हुए एक प्रायोगिक परियोजना शुरू की गई

घटक:
इस परियोजना के दो घटक हैं: मूल कार्यक्षेत्रों में सुधार एवं डाकघरों के लुक एण्ड फील का उन्नयन।

डाकघर स्तर पर प्रमुख कार्यक्षेत्रों में सुधार:

डाक वितरण - प्राप्त होने के दिन ही वितरण।

बचत बैंक - काउंटरों पर लेन-देन के समय में कमी लाना।

धन प्रेषण - मनी आर्डरों का प्राप्त होने के दिन ही वितरण।

कार्यालय सेवा स्तर - ग्राहक संतुष्टि में सुधार, स्वच्छता, उपयोगी फार्म, ग्राहक सेवा केंद्र, नागरिक घोषणा पत्र।

 

डाकघरों के परिवेश में सुधार “लुक एण्ड फील”:

ब्रैंडिंग - एकरूप ब्रैंड व्यवस्था सुनिश्चित करना।

प्रौद्योगिकी - सभी डाकघरों को टेक्नोलोजी आधारित सेवाएं प्रदान करने हेतु सक्षम बनाना।

मानव संसाधन - कर्मचारियों के प्रचालनात्मक कौशल एवं व्यवहार कुशलता को बढ़ाना।

बुनियादी ढांचा - अंदरूनी एवं बाहरी रूपरेखा का मानकीकरण।

परियोजना से लाभ:

  1. एक अनोखी ब्रैंड पहचान स्थापित करने हेतु ‘लुक एण्ड फील’ के तहत डाकघरों के रूप-रंग में सुधार करना।
  2. वेब आधारित धनप्रेषण सेवाओं के माध्यम से धनराशि का सरल एवं त्वरित लेन-देन।
  3. प्रौद्योगिकी के समावेशन तथा कर्मचारियों को व्यवहार कुशलता का प्रशिक्षण देने के माध्यम से काउंटरों पर प्रतीक्षा समय को कम करना।
  4. डाकघरों में प्राप्ति के दिन ही वितरण के लिए भेजी गई डाक के प्रतिशत में सुधार लाना।
  5. अन्य कार्यालयों को प्रेषित डाक के प्रतिशत में सुधार।
  6. चरण I  से IV डाकघरों में लगभग 100% और चरण V डाकघरों में 97% तक बचत बैंक खातों के हस्ताक्षरों की स्कैनिंग।
  7. काउंटरों पर शीघ्र लेन-देन तथा डाकघरों में प्राप्त मृत्यु दावों, खाता स्थानांतरण एवं खाता बंद करने के आवेदनों के सभी मामलों का समय पर निपटान।
  8. संबंधित डाकघरों के कार्य-निष्पादन के मूल्यांकन के लिए ‘स्थानीय नागरिक मंचों’ का गठन।
  9. शिकायतों की ऑनलाइन हैंडलिंग एवं उनका समय पर निपटान।
  10. उचित संकेतों, लेखन बोर्ड, नागरिक घोषणा पत्रों तथा डाकघरों में फार्मों की पर्याप्त उपलब्धता के माध्यम से पब्लिक हॉल में सुविधाजनक वातावरण बनाना।
  11. गलत भेजी गई एवं वापस भेजी गई मदों के अधिक प्रतिशत वाले डाकघरों की संख्या कम करना।
  12. वीडियो कान्फ्रेंस के माध्यम से उत्कृष्ठ प्रदर्शन का मूल्यांकन तथा इसकी सततता सुनिश्चित करना।

 

प्रोजेक्ट ऐरो ‘डाक प्रणाली’ में एक समेकित एवं स्थाई सुधार लाने का कार्यकारी मॉडल है और इसे वर्ष 2008-2009 के लिए लोक प्रशासन में उत्कृष्ठता के लिए वर्ष 2010 में “प्रधान मंत्री” पुरस्कार से नवाजा गया।

निगरानी तंत्र:

क्षेत्रीय (फील्ड) इकाइयों से मानवीय हस्तक्षेप के बिना सर्वर से सीधे डाटा एकत्र करने के लिए एक वेब-आधारित निगरानी तंत्र (डाटा एक्स्ट्रैक्शन टूल) का निर्माण किया गया है। सभी 22 सर्किलों के मुख्य पोस्टमास्टर जनरलों को हर पखवाड़े में (पहले प्रत्येक सप्ताह में) वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से डाटा विश्लेषण की प्रस्तुति की जाती है। सभी प्रमुख निष्पादन सूचकों (केपीआई) की गहराई से छान-बीन की जाती है और कार्यान्वयन की कमियों एवं उन्हें दूर करने के उपायों के बारे में वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग में चर्चा की जाती है। राष्ट्रीय मुख्यालय स्तर पर एवं सभी 22 सर्किल मुख्यालयों में इस कार्य के लिए समर्पित प्रोग्राम कार्यालय स्थापित किए गए हैं। डाकघरों से डाटा का आदान-प्रदान एवं सर्किल प्रोग्राम कार्यालयों के साथ पत्राचार केवल ई-मेल के माध्यम करने का प्रावधान है। कार्यकलाप के स्वरूप के आधार पर केपीआई में 0% से 5% की छूट का स्तर निर्धारित किया गया है।

डाक विभाग के राजस्व एवं डाकघरों में ग्राहकों की संख्या पर प्रोजेक्ट ऐरो का प्रभाव:

चरण- I से IV तक कवर किए गए 1724 प्रोजेक्ट ऐरो डाकघरों के संबंध में तुलनात्मक डाटा उपलब्ध है। इन डाकघरों का राजस्व वर्ष 2010-11 में 1346 करोड़ रु. की तुलना में वर्ष 2011-12 में 18.55% की वृद्धि के साथ 1596 करोड़ रु. हो गया है। इन डाकघरों में ग्राहकों की संख्या में भी वृद्धि हुई हैं, जो कि इन डाकघरों में बुक किए गए लेखादेय वस्तुओं में हुई 20.39% की वृद्धि (वर्ष 2010-11 में 11.87 करोड़ वस्तुओं से 2011-12 में 14.29 करोड़ वस्तुओं तक) से स्पष्ट है। प्रोजेक्ट ऐरो की शुरुआत के बाद प्रमुख कार्यप्रचालनों में प्रमुख निष्पादन सूचकों के माध्यम से हुए सुधार को नीचे दिए गए ग्राफिक्स में दर्शाया गया है:

About Project Arrow



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वर्तमान स्थिति :

(क) अद्यतन स्थिति के अनुसार प्रमुख कार्यकलापों के लिए प्रोजेक्ट ऐरो के तहत मॉनीटर किए गए डाकघरों की संख्या 15582 है।

चरण I से IV = 1,724

चरण V = 8,724

चरण VI = 5,134

डाकघरों की कुल संख्या = 15,582

 

(ख) लुक एण्ड फील के तहत अब तक शामिल किए गए डाकघरों की संख्या निम्नानुसार है:

अप्रैल 2008 में 50 डाकघरों से शुरुआत करते हुए 31/03/2012 तक 5 चरणों में 1843 डाकघर अभी तक कवर किए गए हैं।

प्रस्तावित कार्ययोजना :

इस वर्ष प्रमुख कार्यप्रचालन की मॉनीटरिंग के लिए 3000 अतिरिक्त कंप्यूटरीकृत डाकघरों को शामिल किया जा रहा है और 12वीं योजना के दौरान 2500 डाकघरों में लुक एण्ड फील के तहत कार्यकलाप शुरू किए जाएंगे।